ब्रह्मा समाज | Brahmo Samaj in Hindi

Dheeraj Pandit

ब्रह्मा समाज (Brahmo Samaj) की स्थापना राजा राम मोहन राय और द्वारका नाथ टैगोर ने  की थी . इस समाज का उद्देश्य विभिन्न धार्मिक आस्थाओं में बटी जनता को एकत्रित करना तथा सामाजिक और धार्मिक सुधार करना था.

१९ वी  सदी के बंगाल पुनर्जागरण का यह प्रथम  आन्दोलन था . इस समय हिंदू धर्म अपने रास्ते से भटक गया था .यह कर्मकांडो तथा  पाखंडो से भर गया था . हर जगह अंधविश्वास फैला हुआ था . समाज में बहुत सी कुरीतिया और कुप्रथाए  आ गयी थी जिसका फायदा उठाकर इसाई मिशनरी हिन्दू धर्म पर आक्षेप कर रहे थे और हिन्दुओ को इसाई धर्म में परिवर्तित कर रहे थे . इसलिए राजा राम मोहन राय समय समय पर इन मिसनरियो को जवाब दे रहे थे .

 निर्माण और संचालन 

धार्मिक कर्मकांडो ,  पाखंडो तथा कुरितियो को समाप्त करने के लिए १८१४ -१५  में राजा राम मोहन राय ने आत्मीय सभा  की स्थापना की . यही आत्मीय सभा २० अगस्त  १८२८ में ब्रह्मा समाज के रूप में जानी गयी . राजा राम मोहन राय ने सफलतापूर्वक इसका संचालन किया और इसके साथ ही  द्वारका नाथ टैगोर  को उन्होंने अपना उत्तराधिकारी  बनाया .

१८३३ में राम मोहन राय की मृत्यु होने के बाद द्वारका नाथ टैगोर  ने ब्रह्मा समाज का कार्यभार संभाला . कुछ समय बाद केशव चंद्रसेन  भी इस आन्दोलन से जुड़ गए. केशव चंद्रसेन बहुत ही प्रकर्ति के थे . उन्होंने बौद्ध धर्म , इसाई धर्म  तथा इस्लाम धर्म का अध्ययन  किया. उन्होंने  इस समाज का प्रसार करने के लिए  बम्बई में प्रार्थना समाज तथा मद्रास में वेद समाज की स्थापना की.इनके प्रयास से उत्तर प्रदेश तथा पंजाब में इस समाज का प्रसार हुआ .

विभाजन (Division of Brahmo Samaj)

केसव चन्द्र सेन ने अल्पायु में अपनी लड़की की शादी बिहार के राजा के साथ कर दी जो कि ब्रह्मा समाज के विरुद था .इस पर उनका द्वारका नाथ टैगोर के साथ मतभेद हो गया .  इसी से परेशान होकर द्वारका नाथ टैगोर ने इन्हें इस समाज से बहार निकाल दिया . १८६५ में ब्रह्मा समाज का विभाजन हो गया . द्वारका नाथ टैगोर के स्ममित्व वाला य़ह समाज आदि ब्रह्मा समाज कहलाया जबकि केसव चन्द्र सेन के स्ममित्व वाला य़ह समाज भारतीय ब्रह्मा समाज कहलाया . १८८२ में इस समाज का एक बार फिर से विभाजन हुआ .

 

 सिद्धांत

  • ईश्वर एक है और वही इस दुनिया के रचियता और रक्षक है.
  • आत्मा अमर है.
  • सभी मनुष्यों को अहिंसा का पालन करना चाहिये.
  • सभी मानव समान है और मानव मानव के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिये

 उद्देश्य (Purpose of Brahmo Samaj)

  • सामाजिक व् धार्मिक कुरितियो को समाप्त करना.
  • बौद्धिक एवं तार्किक जीवन स्थापित करना .
  • एकेश्वरवाद पर बल देना.

 कार्य

  • वेदों और उपनिषदों की महत्ता को सबके सामने लाया गया .
  • समाज में व्याप्त कुरितियो जैसे सती प्रथा, जातिवाद, पर्दा प्रथा, बाल विवाह आदि का विरोध करना .
  • किसान मजदूरो के लिए कम करना तथा उनके पक्ष में बोलना .
  • पाश्चात्य दर्शन एवं साहित्य का अध्ययन करके इससे अच्छी -२ बातो को ग्रहण करना .

ब्रह्मा समाज :  उपलब्धि (Achievement of Brahmo Samaj)

  • १८२९ में विलियम बेंटिक ने राजा राम मोहन से प्रभावित होकर सती प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया .
  • सामाजिक व् धार्मिक परिवर्तन .
  • धर्म व् जाति पर आधारित भेदभाव में कमी .

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